पृष्ठ एवं वाह्यांग :-
नेट्रम म्यूर :- अंग सो जाते हैं। ग्रीवा, कृश। दुर्बलता, सर्वांगीण। पीठ, ठण्ढ़ी। पृष्ठ वेदना, पीठ के बल लेटने से हल्की। शोफ।
नेट्रम फास :- कसक, कलाईयों में। गठिया, जीर्ण। घुटनों में दर्द। जानु पृष्ठ कण्डराओं में दुखन। टखने दुर्बल। दर्द का प्रसार हृदय की ओर। भुजाएं, थकी हुई। हाथ अकड़ जाते हैं।
काली म्यूर :- ग्रन्थियां सूजी हुई। तुषार दंश। पाद शोथ। पैरों में सूजन।
कैल्केरिया फास :-
अंगों की शीतलता। कसक अंगों की। गठिया आमवाती। चलना देर से सीखता है। दर्द, प्रजंघिकास्थि में। धनुष्पद। नखमूलों पर पीड़ा। हाथ सो जाते हैं।
काली फास :- अंगों में खुजली। कसक दोनों कन्धों के मध्य। दर्द, गोली लगने जैसा। नितम्ब उत्पीड़क। पक्षाघाती खंजता। पृष्ठ वेदना, प्रातः कालीन वृद्धि। पैरों की स्वचल गति। मांस पेशियों की दुर्बलता। सहज ही ठोकर खाकर गिर पड़ता है।
फेरम फास :- आमवाती ज्वर, मांसपेशी परक। ग्रीवा अकड़ी हुई। दर्द, कन्धों में। हथेलियां गर्म।
कैल्केरिया फ्लोर :- उंगलियों की सन्धियों का विवर्धन। कटि वेदना । ग्रन्थियां, कठोर। गण्डिका। थकान की अनुभूति। पीठ में दर्द। सन्धियों की कड़कड़ाहट।
साईलीसिया :- अन्य: नवोत्पत्ति। गुदास्थि, उत्पीड़क। टखनों में दर्द। दर्द, पैरों के माध्यम से। नाखून, फटे हुए। पैरों में दुखन। भुजाएं, भारी। मेरुदंड अति सम्वेदनशील।
कैल्केरिया सल्फ :- पद तलों में जलन और खुजली। पैरों की जलन।
काली सल्फ :- - दर्द चलायमान। पृष्ठ वेदना सायं कालीन वृद्धि।
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