बुधवार, 12 जुलाई 2023

नेट्रम सल्फ :-

मन :- आत्महत्या की प्रवृत्ति। दुष्प्रभाव, चोटोत्तर।भय , दायीं ओर गिरने का। निराशा रोग मुक्ति के प्रति। सिर में चोट लगने का दुष्प्रभाव।

सिर :- कपाल शीर्ष में स्पन्दन या जलन। चोट का दुष्प्रभाव। दबाव की अनुभूति। दर्द जीर्ण, पित्त वमन सहित। बाल झड़ते हैं, पित्त दोष सहित। सिर की ओर रक्त का वहाव अधिक।

नेत्र :- पलकों में जलन। 

कर्ण :- आर्द्र जलवायु से रोग वृद्धि। ध्वनि, घण्टी जैसी। 

नासिका :- नथुनों के अन्दर की खुजली। नाक के अन्दर जलन। श्लैष्मिक ज्वर। 

चेहरा :- पाण्डुवर्ण। पीला। फीका।

मुख :- 

जिह्वा एवं स्वाद :- जिह्वा, भूरी हरी। स्वाद, कड़वा।

दांत एवं मसूढ़े :- 

कण्ठ :- 

पाचन प्रणाली :- आध्मान, यकृत की निष्क्रियता के साथ। पित्तात्मकता। वमन, पित्त। 

उदर एवं मल :- अतिसार, आर्द्र जलवायु में, पित्तात्मक। उदर शूल, सीसा विषपरक। गुदा, मस्सों से घिरा हुआ। यकृत, दुखनशील एवं रक्त संकुल।

मूत्र सम्बन्धी लक्षण :- मूत्र, ईंटे के चूरे जैसे तलछट सहित। मूत्र, पित्तात्मक, रेतीला। मूत्रोत्सर्जन करते समय जलन।

नारी रोग लक्षण :- आर्तव श्राव के साथ अतिसार और / या मलबद्धता और/ या नकसीर। आर्तव श्राव संक्षारक।

श्वास प्रणाली :- बलगम रस्सी जैसा गठा हुआ। 

हृदय :- 

पृष्ठ एवं वाह्यांग :- 

स्नायु प्रणाली :-  

नींद एवं स्वप्न :- आध्मान युक्त पीड़ा से नींद टूट जाती है। तन्द्रा भाव। स्वप्न, झगड़ने के। 

ज्वर लक्षण :- पीत ज्वर। श्लैष्मिक ज्वर।

चर्म :- त्वचा, पाण्डुवर्ण। शोथ। 

उत्तक :- 

रुपात्मकतायें :-  वृद्धि :- आर्द्र बरसाती मौसम में और पानी से।नहाने से।

ह्वास :- जलवायु परिवर्तन से। तप्त शुष्क जलवायु से।

नेट्रम म्यूर :-

मन :- क्रोधी स्वभाव। दुष्प्रभाव, क्रोधोत्तर। नाचने और गाने की प्रवृत्ति। शोकातुर। 

सिर :- कसक, नासिका मूल पर। दर्द, लू लग जाने से। दर्द, सूर्योदय से सूर्यास्त तक। सिर,खुला होने की अनुभूति।

नेत्र :- अधिमंथ। छाले। पढ़ते समय शब्द साथ साथ दौड़ते हैं। 

कर्ण :- 

नासिका :- गन्ध का लोप। जुकाम, बहता हुआ। नकसीर खांसने या झुकने से। प्रतिश्याय के साथ गन्ध का लोप। पृष्ठ नासारन्ध्र शुष्क। फुन्सियां, नाक पर। श्राव, पिण्डीभूत, स्वच्छ। सुन्नपन महसूस होता है, एक ओर।

चेहरा :- ठोढ़ी पर दाने। चेहरे का स्नायु शूल, कुनीन के बाद। 

मुख :- अधर फटे हुए। अलि जिह्वा ढ़ीली। मुख कोणों पर दरारें, फफोले। लार श्राव। 

जिह्वा एवं स्वाद :- जिह्वा, चित्र खचित, झागदार। स्वाद का लोप। 

दांत एवं मसूढ़े :- लार श्राव। 

कण्ठ :- अलि जिह्वा ढ़ीली, विवर्धित। कण्ठदाह जीर्ण। रुक्षता।

पाचन प्रणाली :- अरुचि, रोटी के प्रति। इच्छा, कड़वे पदार्थों की। वमन, काफी के बीजों जैसा, श्लैष्मिक। 

उदर एवं मल :- अतिसार, असंयत या निरंकुश। गुदा, विस्फोटों से घिरा हुआ। जलन और पीड़ा। मलबद्धता का अतिसार के साथ पर्यायक्रम। मलान्त्र के अन्दर सूचीबेधी अनुभूति। 

मूत्र सम्बन्धी लक्षण :- निरंकुश मूत्रता, खांसते समय।

नारी रोग लक्षण :- आर्तव श्राव के साथ विषाद। आर्तव श्राव विपुल मात्रा में, विलम्बित। खुजली, वाह्य जननांगों की। गर्भाशय के अन्दर जलन। प्रदर श्राव, पनीला, चुभन और / या क्षोभण पैदा करने वाला । 

श्वास प्रणाली :- बलगम झागदार, पनीला। श्वसनिकाशोथ जीर्ण।

हृदय :- अतिवृद्धि। नाड़ी, तीव्र, सर्वत्र अनुभूत।‍ सिकुुड़न।

पृष्ठ एवं वाह्यांग :- अंग सो जाते हैं। ग्रीवा, कृश। दुर्बलता, सर्वांगीण। पीठ, ठण्ढ़ी। पृष्ठ वेदना, पीठ के बल लेटने से हल्की। शोफ। 

स्नायु प्रणाली :- 

नींद एवं स्वप्न :- नींद अत्यधिक एवं स्फूर्ति हीन। स्वप्न, अधीर, मानसिक श्रम करने के।

ज्वर लक्षण :- कम्पकम्पी, प्रातः कालीन। सविरामी ज्वर।

चर्म :- कीट दंश। जीर्ण चर्मरोग। दरारें, पैरों की उंगलियों के मध्य। दाढ़ी के बाल झड़ते हैं। 

उत्तक :- श्राव, पनीले।

रुपात्मकतायें :-  वृद्धि :- कुनीन के सेवन से। स्टार्च युक्त आहार से।

ह्वास :- सायं काल में।

मैग फास :-

मन :- स्वयं से बातें करती रहती है।

सिर :- सिर का कम्पन। सिर में उद्वेष्टकर पीड़ा।

नेत्र :- नेत्र पटल सिकुड़े हुए। प्रकाश के प्रति सम्वेदनशील।

कर्ण :- 

नासिका :- 

चेहरा :- चेहरे का स्नायु शूल, शरीर ठंडा पड़ने पर।

मुख :- मुख कोणों का आक्षेपी स्फुरण। स्फुरण।

जिह्वा एवं स्वाद :- लाल और शुष्क जिह्वा।

दांत एवं मसूढ़े :- मसूढ़े स्पर्श के प्रति सम्वेदनशील।

कण्ठ :- अनुभूति, दमघुुटने की। सिकुड़न उद्वेष्टकर।

पाचन प्रणाली :- अम्ल पदार्थों के प्रति सम्वेदनशील। इच्छा, चीनी की। ऊर्ध्व निक्षेप। मितली और वमन।

उदर एवं मल :- उदर शूल। ऐंठन युक्त पीड़ा। पित्त शूल। मलबद्धता, छोटे बच्चों में। 

मूत्र सम्बन्धी लक्षण :- मूत्र, अवरुद्ध। 

नारी रोग लक्षण :- आर्तव श्राव रेशेदार। कष्टार्तव, झिल्ली परक।

श्वास प्रणाली :- खांसी, आक्षेपी, उद्वेष्टकर और / या स्नायविक । काली खांसी। वक्ष आकुंचनशील।

हृदय :- 

पृष्ठ एवं वाह्यांग :- 

स्नायु प्रणाली :- मद्य विषण्णता। स्फुरण।

नींद एवं स्वप्न :- 

ज्वर लक्षण :- 

चर्म :- उस्तरे के उद्भेद।

ऊत्तक :- 

रुपात्मकतायें :-  वृद्धि :- दायीं ओर। लेटने से।

ह्वास :- दूध से। दोहरा होने से। धैर्य बंधाने से। मसलने से।

नेट्रम फास :-

मन :- आकांक्षा हीन।

सिर :- 

नेत्र :- पलकें आपस में चिपक जाती है। मन्द दृष्टि। रक्ताभ।

कर्ण :- 

नासिका :- 

चेहरा :- नीला। धब्बेदार।

मुख :- 

जिह्वा एवं स्वाद :- जिह्वा, कोमल, क्रीम जैसी। स्वाद, तीखा।

दांत एवं मसूढ़े :- दांत करकराने की आदत, सुप्तावस्था में। 

कण्ठ :- पृष्ठ नासारन्ध्रों का गिरना।

पाचन प्रणाली :- अम्लता। वमन, अम्ल।

उदर एवं मल :- अतिसार, हरा। कृमि विकार। गुदा की खुजली।

मूत्र सम्बन्धी लक्षण :- 

नारी रोग लक्षण :- आर्तव श्राव के साथ उत्तेजना। आर्तव श्राव तीखा, पीला। प्रदर श्राव, अम्लज। जरायु की स्थान च्युति।

श्वास प्रणाली :- वक्ष में उत्ताप की अनुभूति।

हृदय :- 

पृष्ठ एवं वाह्यांग :- कसक, कलाईयों में। गठिया, जीर्ण। घुटनों में दर्द। जानु पृष्ठ कण्डराओं में दुखन। टखने दुर्बल। दर्द का प्रसार हृदय की ओर। भुजाएं, थकी हुई। हाथ अकड़ जाते हैं।

स्नायु प्रणाली :- चाल लड़खड़ाती हुई। तंत्रिका शूल, अन्तरापर्शुक। 

नींद एवं स्वप्न :- स्वप्न, मृतकों के और / या सम्भोग के।

ज्वर लक्षण :- पसीना, खट्टे गन्ध वाला। पैर ठण्ढ़े।

चर्म :- 

उत्तक :- श्राव शहद के रंग जैसे।

रुपात्मकतायें :-  वृद्धि :- मछली खाने से।

ह्वास :- 

कैल्केरिया फास :-

मन :- निराशोत्तर दुष्प्रभाव। भविष्य के प्रति अधीर। मन्द बोधगम्यता।

सिर :- कसक ग्रीवा सन्धि एवं पश्चकपाल में। कसक माथे पर।
शीतानुभूति सिर में।

नेत्र :- 

कर्ण :- 

नासिका :- नथुने दुखनशील। सर्दी ज़ुकाम की प्रवृत्ति। 

चेहरा :- रक्ताल्प और / या मलिन। कर्ण मूल एवं हनु ग्रन्थियों का सूजन। 

मुख :- 

जिह्वा एवं स्वाद :- सुन्न। 

दांत एवं मसूढ़े :- दन्तोदगम कालीन व्याधियां। दन्तोपसर्ग, सगर्भ कालीन।

कण्ठ :- कण्ठ दाह ढ़ीला। वक्ताओं का कण्ठ।

पाचन प्रणाली :- आध्मान। इच्छा शूकर मांस की। वमन ठण्ढ़ा पानी पीने के बाद। वमन शिशु।

उदर एवं मल :- अतिसार फलों से। उदर शूल, बच्चों का। उदर धंसा हुआ। गुदानाल व्रण। पित्ताश्म। मलबद्धता, वयोवृद्ध जनों में। सुखण्डी।

मूत्र सम्बन्धी लक्षण :- निरंकुश मूत्रता। बढ़ा हुआ मूत्र। मूत्राशय के अन्दर पथरी। 

नारी रोग लक्षण :- आर्तव श्राव के साथ आमवाती दर्द। आर्तव श्राव, प्रत्येक दूसरे सप्ताह। प्रदर श्राव श्लैष्मिक। स्तन बढ़े हुए।
स्तनों में जलन।

श्वास प्रणाली :- खांसी, दमघोंटनेवाली। 

हृदय :- श्वास लेते समय दर्द, हृदय में।

पृष्ठ एवं वाह्यांग :- अंगों की शीतलता। कसक अंगों की। गठिया आमवाती। चलना देर से सीखता है। दर्द, प्रजंघिकास्थि में। धनुष्पद। नखमूलों पर पीड़ा। हाथ सो जाते हैं। 

स्नायु प्रणाली :- रेंगने की अनुभूति। 

नींद एवं स्वप्न :- :- तन्द्रा भाव, वयोवृद्ध जनों में। निद्रावस्था में रोता है। निद्रावस्था से जगाना कठिन।


ज्वर लक्षण :- 

चर्म :- त्वचा, चित्तीदार और / या झुर्रीदार। 

ऊत्तक :- शोथ। श्राव अन्नसार युक्त। क्षयकारी रोग।

रुपात्मकतायें :-  वृद्धि :- जलवायु परिवर्तन से। रोग के बारे में सोचने से।

ह्वास :- नीचे लेटने से।

काली फास :-

मन :- अत्यधिक लज्जा नील। असंतोष। कराहना। जड़िमा। निद्रा भ्रमण। निद्रालाप। परिवर्तन शील स्वभाव। हम, स्नायविक। भयातुर। निराशा। निशा भीति। रुदनशील स्वभाव। शंकालु।

सिर :- अल्प रक्तता। बाल झड़ते हैं अल्प रक्तता से, स्नायु दौर्बल्य से। सिर के पीछे भार की अनुभूति।

नेत्र :- काले धब्बे, नेत्रों के आगे।

कर्ण :- ध्वनियां, बहरेपन के साथ, सिर में। 

नासिका :- पृष्ठ नासा रंध्रों से खंखारना। श्राव दुर्गन्धित।

चेहरा :- ज्वलनशील। नेत्र अन्दर की ओर धंसे हुए। मांस पेशियों की अशक्तता।

मुख :- मसूढ़े रक्त श्रावी, बहते हुए। 

जिह्वा एवं स्वाद :- 

दांत एवं मसूढ़े :- दन्त मल।

कण्ठ :- निगरण की अविराम इच्छा। स्वर यन्त्र का पक्षाघात।

पाचन प्रणाली :- अरुचि, मिष्टान्न के प्रति। आध्मान हृदय की धड़कन के साथ।

उदर एवं मल :- अतिसार दर्द हीन, दुर्गन्धित, भय से। उदर सूजा हुआ। 

मूत्र सम्बन्धी लक्षण :- रक्त श्राव मूत्रमार्ग से।

नारी रोग लक्षण :- आर्तव श्राव अनियमित, तीव्र गन्ध वाला एवं समय से पूर्व। वातोन्मादी लक्षण।

श्वास प्रणाली :- बलगम नमकीन। 

हृदय :- धड़कन। संचार मन्द।

पृष्ठ एवं वाह्यांग :- अंगों में खुजली। कसक दोनों कन्धों के मध्य। दर्द, गोली लगने जैसा। नितम्ब उत्पीड़क। पक्षाघाती खंजता। पृष्ठ वेदना, प्रातः कालीन वृद्धि। पैरों की स्वचल गति। मांस पेशियों की दुर्बलता। सहज ही ठोकर खाकर गिर पड़ता है।

स्नायु प्रणाली :- दुर्बलता। निशा भीति। विसर्पी पक्षाघात। गेंद की अनुभूति। भय। शिशु अंगाघात। स्नायविकता।

नींद एवं स्वप्न :- रोते रोते जागता है। स्वप्न, कामोत्तेजक और /या गिरने के।

ज्वर लक्षण :- आन्त्रिक ज्वर। प्रमस्तिष्कीय ज्वर। पसीना विपुल।

चर्म :- रेंगने की अनुभूति। श्राव क्षोभण पैदा करने वाला।

ऊत्तक :- दुर्गन्धित श्राव। 

रुपात्मकतायें :-  वृद्धि :- निरन्तर व्यायाम करने से। प्रबल आयास करने से। पूर्ण विश्राम द्वारा। बैठे रहने के बाद उठते हुए। शोरगुल से।

ह्वास :- खाना खाने से। धीरे धीरे चलने से। साथ रहने से। हवा की डकारों से। हर्षोत्फुल उत्तेजना से।

फेरम फास :-

मन :- वैराग्य भावना।

सिर :- सिर दर्द, नकसीर फूटने पर हल्का।  सिर दर्द ,रक्त संलयी। पीड़ा स्पर्श करने से। 

नेत्र :- नेत्र गोलक दुखनशील। नेत्र में रेतीले कणों की अनुभूति।

कर्ण :- 

नासिका :- रक्त श्राव। सर्दी ज़ुकाम।

चेहरा :- चेहरा तपा हुआ। चेहरा तमतमाया हुआ। लाल।

मुख :- 

जिह्वा एवं स्वाद :- लाल।

दांत एवं मसूढ़े :- 

कण्ठ :- कण्ठ शुष्क।

पाचन प्रणाली :- अरूचि, खट्टे खाद्यान्नों के प्रति, दूध के प्रति, मांस के प्रति। इच्छा उद्दीपक पदार्थों की। वमन नाश्ता करने से पहले।

उदर एवं मल :- अतिसार, अपचित भोजन के। अतिसार ठंड से।

मूत्र सम्बन्धी लक्षण :- मूत्र, दबा हुआ। 

नारी रोग लक्षण :- आर्तव श्राव, चमकता हुआ लाल। आर्तव श्राव, प्रत्येक तीसरे सप्ताह। सगर्भ कालीन मितली और वमन।

श्वास प्रणाली :- खांसी उग्र, कठोर, गुदगुदाहट के साथ, शुष्क, रुक रुक कर होने वाली। फुस्फुसीय रक्त संकुलन। वक्ष में जलन। श्वास रोध।

हृदय :- नाड़ी सर्वत्र उछलती हुई। हृत शोथ।

पृष्ठ एवं वाह्यांग :- आमवाती ज्वर, मांसपेशी परक। ग्रीवा अकड़ी हुई। दर्द, कन्धों में। हथेलियां गर्म।

स्नायु प्रणाली :- तंत्रिका शूल, रक्त संकुलन।

नींद एवं स्वप्न :- 

ज्वर लक्षण :- रक्त ज्वर।

चर्म :- 

उत्तक :- घाव । मोच।

रुपात्मकतायें :-  वृद्धि :- 

ह्वास :-